एक रात में गायब हुआ पूरा शहर: भारत की सबसे रहस्यमयी घटना

एक रात में गायब हुआ पूरा शहर: भारत की सबसे रहस्यमयी घटना

वो शहर जो एक रात में गायब हो गया: भारत की सबसे रहस्यमयी कहानी

भारत की इतिहास-किताबों में बहुत सी कहानियाँ दर्ज हैं राजाओं की, युद्धों की, प्रेम की, विद्रोह की। लेकिन एक कहानी ऐसी भी है… जिसकी न कोई फाइल मिली, न कोई रिकॉर्ड, न कोई फोटो। बस कुछ बुज़ुर्गों की फुसफुसाहट, कुछ बचे हुए टूटे पत्थर  और कुछ डरे हुए किस्से। कहते हैं, वो शहर एक ही रात में गायब हो गया था।

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कहानी शुरू होती है 1971 की एक सर्द रात से

राजस्थान के एक सूखे इलाके में एक छोटा-सा शहर था धूलपुरख़ाना। सरकारी रिकॉर्ड में इसका नाम कहीं दर्ज नहीं मिलता, लेकिन आसपास के गांवों में आज भी बच्चे को डराने के लिए कहा जाता है “रात देर मत घूमना, नहीं तो धूलपुरख़ाना बुला ले जाएगा  उस शहर की आबादी लगभग 9,000 थी। सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। लोग खेतों में काम करते, बच्चे स्कूल जाते, शाम को चाय की दुकान पर विदेशी क्रिकेट टीमों पर बहस होती। लेकिन 10 दिसंबर 1971 की रात को कुछ ऐसा हुआ जिसे आज तक कोई समझ नहीं पाया।

अचानक आसमान का रंग काला नहीं, नीला हो गया

रात के करीब 1:15 बजे। कहते हैं आसमान में एक अजीब-सी नीली चमक फैलने लगी। गोली-बारूद की आवाजें सुनने वाले लोग कहते हैं कि यह बम धमाके नहीं थे, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे आसमान खुद फट रहा हो।
मौसम विभाग के एक रिटायर्ड कर्मचारी ने बताया: हमारी मशीनें पागल हो गई थीं। तापमान 22°C दिखा रही मशीन अचानक -6°C पर पहुंच गई। न हवा चल रही थी, न बादल थे लेकिन तूफ़ान की गूंज सुनाई दे रही थी।” लेकिन असली रहस्य तो सुबह खुला।

Raat Ka Andhera

सुबह 5 बजे… पूरा शहर गायब था

बगल के गांवों से लोग जब शहर में दूध देने आए, तो उन्होंने देखा घर मौजूद थे, दुकानें भी, सड़कें भी लेकिन एक भी इंसान नहीं था। न किसी के कपड़े मिले,  न शरीर,  न खून,
न संघर्ष के कोई निशान। चाय की दुकान पर, चूल्हा जल रहा था। कुर्सियां बाहर पड़ी थीं। कुकर में अभी भी भाप थी।
लेकिन दुकानदार नहीं था। स्कूल के मैदान में, बैठक के लिए रखी कुर्सियां पड़ी थीं। ब्लैकबोर्ड पर लिखा था: कल विज्ञान का टेस्ट होगा” लेकिन स्कूल में एक बच्चा तक नहीं मिला।

सरकार ने 4 दिन में पूरे शहर को सील कर दिया

आर्मी पहुंची। जांच टीमें पहुंचीं। लेकिन 96 घंटे बाद शहर पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा दिया गया “प्रतिबंधित क्षेत्र  प्रवेश वर्जित” बोर्ड आज भी खड़ा है। सरकार ने फाइलें बंद कर दीं। कोई रिपोर्ट नहीं जारी हुई। लेकिन पास के गांव के बुज़ुर्ग एक और बात बताते हैं

शहर के लोग गायब नहीं हुए उन्हें “बुला लिया गया”

कई लोगों ने दावा किया कि उस रात शहर के ऊपर 200 मीटर ऊंचाई पर एक गोलाकार नीली रोशनी दिखाई दी थी
जिसके बाद एक भयंकर धड़कन-सी आवाज आई।
कुछ कहते हैं यह भूगर्भीय घटना थी। कुछ कहते हैं दुश्मन देश का सीक्रेट वेपन था। कुछ कहते हैं एलियन इंटरवेंशन। लेकिन बुज़ुर्ग तो एक ही बात कहते हैं “वो रोशनी इंसानों की नहीं थी।”

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1983 में फिर से जांच हुई और जांच अधिकारी ही गायब हो गया

इस घटना के 12 साल बाद सरकार ने फिर से जांच कमेटी बनाई। टीम का नेतृत्व करने पहुंचे अफसर रमेश चतुर्वेदी,
जो अपनी इंटेलिजेंस और ईमानदारी के लिए पूरे राज्य में मशहूर थे। उन्होंने खाली पड़े स्कूल, घरों और बाजारों की जांच की। और आखिरी बार जो नोट उन्होंने लिखा… वह आज भी फाइल नंबर 7C/1983 में दर्ज है: “इस शहर में लोगों के गायब होने की वजह इंसानी नहीं है।” अगली सुबह
वो भी गायब थे। उनकी जीप वहीं खड़ी मिली। दरवाज़ा खुला था लेकिन अफसर का कोई पता नहीं चला।

आज भी रात के समय उस शहर से आती है एक अजीब-सी धड़कन

कई यूट्यूबर्स और रिसर्चर रात में वहां लाइव वीडियो बनाने गए। कई की कैमरा रिकॉर्डिंग रात 1:15 बजे अपने-आप बंद हो गई। और हर वीडियो में एक बात कॉमन है शहर की हवा में एक अनजान धड़कन की आवाज आती है। कुछ सेकंड्स की, लेकिन बहुत गहरी, जैसे कोई कह रहा हो “हम अभी भी यहां हैं…”

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