क्रिसमस पर चर्च के बाहर हनुमान चालीसा, सांता क्लॉज़ के पुतले तोड़े गए क्या अब क्रिश्चियन भी निशाने पर?
क्रिसमस
एक ऐसा त्योहार जो दुनिया भर में प्यार, शांति और खुशियों का संदेश देता है। लेकिन इस बार, क्रिसमस की रोशनी के बीच एक ऐसा साया उभरा है जिसने देश में धार्मिक तनाव की आग को फिर हवा दे दी है। देश के कुछ इलाकों से ऐसी खबरें सामने आई हैं जहाँ चर्च के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ी गई, और वहीं लगे सांता क्लॉज़ के पुतलों को तोड़ दिया गया। यह सब उस समय हुआ जब अंदर लोग प्रार्थना कर रहे थे और बाहर त्योहार का माहौल होना चाहिए था। लेकिन हुआ क्या? शांति की जगह तनाव बढ़ गया। खुशियों की जगह खामोशी और डर फैल गया।
क्रिश्चियन समुदाय में बढ़ती बेचैनी
इन घटनाओं के बाद कई जगहों पर क्रिश्चियन समुदाय के लोग साफ कह रहे हैं कि वे निशाने पर महसूस कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि पहले मुसलमान समुदाय को टारगेट किया गया अब उसी पैटर्न पर क्रिश्चियन समुदाय को डराया-धमकाया जा रहा है। कुछ लोग बताते हैं कि प्रार्थना सभाओं में बाधा डालने, चर्च के बाहर भीड़ इकट्ठी कर विरोध करने और ईसाई प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। एक बुज़ुर्ग क्रिश्चियन महिला ने कहा “ये त्योहार का दिन था बेटा, लेकिन हमने पूरी रात डर में बिताई।”
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हिंदू संगठनों का क्या कहना है?
कुछ हिंदू संगठनों का कहना है कि यह सब तथाकथित धर्मांतरण के विरोध में हुआ। लेकिन सवाल यह है क्या किसी के त्योहार को तोड़कर, पुतले नुकसान पहुँचाकर, या डर बनाकर विरोध जताना सही तरीका है? धर्म कभी किसी दूसरे धर्म के त्योहार को नष्ट करने की शिक्षा नहीं देता ये राजनीति है, यह गुस्सा है, यह समाज में बढ़ती खाई है जो किसी भी देश के लिए खतरनाक है।
भारत की पहचान पर सवाल
यह वही भारत है जहाँ मस्जिद के सामने मंदिर की आरती गूंजती है और मंदिर के सामने चर्च की घंटियाँ। यह वही भारत है जहाँ त्योहार लोगों को जोड़ते थे लेकिन अब, वही त्योहार लोगों को बाँटने का औज़ार बन रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि हनुमान चालीसा क्यों पढ़ी गई। सवाल यह है कि क्यों चर्च के सामने पढ़ी गई और क्यों पुतले तोड़े गए? यही चीज़ तनाव को जन्म देती है।
सामाजिक सौहार्द की सबसे बड़ी परीक्षा
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की आज़ादी देता है। और किसी भी समुदाय को डराकर, प्रताड़ित कर या धमकाकर यह आज़ादी छीनी नहीं जा सकती।
सरकार और प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी
अब जरूरत है कि प्रशासन:
निष्पक्ष जांच करे
दोषियों पर कार्रवाई करे
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे
और किसी भी समुदाय — हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन — को डर में न जीने दे
क्योंकि लोकतंत्र में बहुमत की आवाज़ नहीं, बल्कि हर नागरिक की सुरक्षा ही असली ताकत होती है।
सवाल पूरे देश का है
क्रिसमस के मौके पर जो हुआ वह सिर्फ एक घटना नहीं है…
यह संकेत है कि देश किस दिशा में जा रहा है। आज अगर क्रिश्चियन निशाने पर हैं, कल कोई और होगा। और जब समाज डर में जीने लगे तो उत्सव केवल तारीखें बनकर रह जाते हैं, त्योहार नहीं।
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