उत्तराखंड रेप केस: VIP कनेक्शन के आरोपों पर भड़की जनता, सड़कों पर इंसाफ़ की मांग

उत्तराखंड रेप केस: VIP कनेक्शन के आरोपों पर भड़की जनता, सड़कों पर इंसाफ़ की मांग

उत्तराखंड: जब इंसाफ़ के लिए पहाड़ भी सड़कों पर उतर आए

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता है, आज आस्था नहीं बल्कि आक्रोश की तस्वीर बन चुका है। शांत पहाड़ों के बीच एक सवाल गूंज रहा है क्या इस देश में इंसाफ़ सिर्फ़ आम लोगों के लिए है, और VIP के लिए अलग क़ानून? राज्य में चल रहा ताज़ा जनप्रदर्शन किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। यह उस VIP कल्चर के ख़िलाफ़ विस्फोट है, जो हर बड़े अपराध के बाद पर्दे के पीछे खड़ा नज़र आता है।

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🔴 एक लड़की, एक इनकार और सिस्टम की बेरुख़ी

मामले की जड़ में है एक युवा लड़की, जो रोज़गार की तलाश में एक रिसॉर्ट पहुँची थी। आरोप हैं कि उस पर अनैतिक दबाव बनाया गया। जब उसने इनकार किया, तो हालात ऐसे बने कि उसकी जान चली गई। यहाँ कहानी ख़त्म हो जानी चाहिए थी, लेकिन यहीं से असली कहानी शुरू होती है।
क्योंकि घटना के बाद से ही एक शब्द बार-बार उभरा VIP।
नाम नहीं, चेहरा नहीं, बस एक साया… जो हर सवाल पर भारी पड़ता रहा।

कार्रवाई दिखी, लेकिन भरोसा नहीं जगा

सरकार ने शुरुआती दिनों में कड़े कदम दिखाए। रिसॉर्ट पर बुलडोज़र चला, कुछ गिरफ्तारियाँ हुईं। कैमरों के सामने संदेश गया कि सरकार सख़्त है। लेकिन जनता का कहना है
यह कार्रवाई न्याय के लिए नहीं, गुस्से को शांत करने के लिए थी।”
क्योंकि असली सवाल अब भी अनुत्तरित हैं:

वो VIP कौन था?

उसका नाम चार्जशीट में क्यों नहीं?

जांच की दिशा बार-बार क्यों बदली?

सड़क से संसद तक गूंजता विरोध



देहरादून, ऋषिकेश, श्रीनगर से लेकर दिल्ली तक लोग हाथों में तख़्तियाँ नहीं, सवाल लेकर निकले हैं। माताएँ डरी हुई हैं। युवतियाँ ग़ुस्से में हैं। और युवा पूछ रहे हैं “अगर आज चुप रहे, तो कल कौन? यह प्रदर्शन किसी पार्टी का नहीं, किसी संगठन का नहीं  यह डर के ख़िलाफ़ जनता की आवाज़ है।

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सरकार बनाम जनता का भरोसा

सरकार और पुलिस बार-बार कह रही है कि:

जांच निष्पक्ष है

VIP एंगल नहीं है

अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं


लेकिन सवाल यह है

अगर सब साफ़ है, तो CBI जांच से परहेज़ क्यों?
यहीं पर सरकार और जनता के बीच भरोसे की दीवार टूटती दिख रही है।

यह मामला सिर्फ़ एक केस नहीं

यह केस इसलिए अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि:
ताक़तवर के सामने क़ानून कैसे झुकता है और इंसाफ़ पाने के लिए आम आदमी को सड़कों पर क्यों उतरना पड़ता है आज उत्तराखंड सिर्फ़ न्याय नहीं मांग रहा वह सिस्टम से ईमानदारी मांग रहा है।

आख़िरी सवाल, जो हर घर तक पहुँचना चाहिए

अगर दोषी VIP हुआ, तो क्या उसे सज़ा मिलेगी? और अगर नहीं मिली तो यह मान लेना चाहिए कि इस देश में बेटियों की सुरक्षा, रसूख़ से कमज़ोर है? उत्तराखंड की सड़कों पर उठता शोर यही कह रहा है

अब खामोशी नहीं, जवाब चाहिए।

✍️ The Quick Report India

हम सवाल पूछते हैं, क्योंकि डर से बड़ा कोई गुनाह नहीं।

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