एक फ़ोन कॉल और माघ मेले का टूटा हुआ इतिहास
माघ मेले के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब शंकराचार्य जी को स्नान करने से रोका गया। यह घटना सिर्फ़ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक सवाल भी खड़े करती है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य जी को फ़ोन कर उनका हालचाल पूछा। यह कॉल सामान्य शिष्टाचार भर नहीं थी, बल्कि उस असहज स्थिति पर प्रतिक्रिया थी, जिसमें देश के सबसे बड़े धर्मगुरुओं में से एक को खुद को अपमानित महसूस करना पड़ा।
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इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य जी को फ़ोन कर उनका हालचाल पूछा। यह कॉल सामान्य शिष्टाचार भर नहीं थी, बल्कि उस असहज स्थिति पर प्रतिक्रिया थी, जिसमें देश के सबसे बड़े धर्मगुरुओं में से एक को खुद को अपमानित महसूस करना पड़ा।
शंकराचार्य जी ने स्नान से रोके जाने पर गहरी नाराज़गी जताई और कहा कि यह सिर्फ़ मेरा नहीं, सनातन परंपरा का अपमान है।
सूत्रों के मुताबिक़ प्रशासन की दलीलें सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर थीं, लेकिन सवाल यह है कि अगर शंकराचार्य भी सुरक्षित नहीं, तो आम श्रद्धालु की क्या गारंटी? अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि आस्था को नियमों के नाम पर कुचला नहीं जा सकता। राजनीतिक हलकों में इसे आने वाले समय में बड़े विवाद की शुरुआत माना जा रहा है।
बड़ा सवाल
क्या यह सिर्फ़ प्रशासनिक चूक थी? या फिर धर्म और सत्ता के बीच टकराव की नई कहानी? माघ मेले की यह घटना अब सिर्फ़ एक खबर नहीं, बल्कि देशव्यापी बहस बन चुकी है।
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