क्या वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने का दावा करने वाला भारत हर बार अमेरिका के सामने थोड़ा झुकता हुआ नज़र आता है? और सवाल ये भी उठ रहा है क्या सिर्फ कूटनीति है ये या इसके पीछे कोई ऐसा दबाव है जिसके बारे में जनता को नहीं बताया जा रहा?
भाग 1: सवाल जो बार-बार उठ रहा है
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक सवाल तेजी से वायरल हो रहा है लोग पूछ रहे हैं क्या अमेरिका के पास ऐसा कुछ है
जिसकी वजह से भारत को हर बार समझौता करना पड़ता है? कुछ लोग इसे एप्सटीन फाइल से जोड़ रहे हैं कुछ लोग कह रहे हैं कि ट्रम्प के पास कोई ‘राज’ है लेकिन सच क्या है?
क्या सच में कोई ब्लैकमेल है? या फिर कहानी कुछ और है?
भाग 2: सबसे पहले – सच और अफवाह अलग करें
सबसे पहले साफ कर दें अभी तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी, अदालत, या विश्वसनीय मीडिया ने नरेंद्र मोदी का नाम एप्सटीन फाइल से जोड़ने की पुष्टि नहीं की है। न कोई आधिकारिक दस्तावेज न कोई प्रमाण न कोई विश्वसनीय रिपोर्ट तो फिर सवाल उठता है अगर ब्लैकमेल नहीं है तो फिर भारत को कई मामलों में अमेरिका के साथ समझौते क्यों करने पड़ते हैं?
भाग 3: असली वजह – ताकत की राजनीति
ये समझना जरूरी है, अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोस्ती से नहीं चलती ताकत और हितों से चलती है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है सबसे बड़ी सैन्य ताकत और वैश्विक सिस्टम पर उसका असर है भारत अभी उभरती हुई ताकत है और सच ये है भारत को जरूरत है: टेक्नोलॉजी की
निवेश की रक्षा उपकरणों की ग्लोबल सपोर्ट की और अमेरिका को जरूरत है: चीन के खिलाफ एक मजबूत पार्टनर की भारत के बाजार की रणनीतिक सहयोग की यानी ये रिश्ता बराबरी का कम जरूरतों का ज्यादा है।

भाग 4: जहां भारत को झुकना पड़ा
कुछ उदाहरण देखें ट्रेड टैरिफ पर समझौते रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी दबाव टेक्नोलॉजी और चिप डील्स में शर्तें रक्षा सौदों में अमेरिकी सिस्टम की प्राथमिकता कई बार भारत ने अपनी शर्तें भी मनवाई हैं लेकिन कई बार समझौता भी करना पड़ा है। और यही अंतरराष्ट्रीय राजनीति की सच्चाई है यहां भावनाएं नहीं हित (Interest) चलते हैं।
भाग 5: असली सवाल – दबाव या रणनीति?
अब बड़ा सवाल क्या मोदी अमेरिका के सामने झुकते हैं?
या फिर ये एक रणनीति है ताकि भारत धीरे-धीरे मजबूत हो सके? विशेषज्ञों का कहना है आज भारत: QUAD का हिस्सा है G20 की अगुवाई कर चुका है ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा है यानी भारत झुक भी रहा है और साथ-साथ अपनी ताकत भी बढ़ा रहा है।
भाग 6: अफवाहों का सच
एप्सटीन फाइल, ब्लैकमेल, सीक्रेट दबाव ये बातें सोशल मीडिया पर जरूर चल रही हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है। और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर जटिल रणनीतियों को साजिश की कहानी बना दिया जाता है। सच ये है दुनिया की राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता है न कोई स्थायी दुश्मन सिर्फ स्थायी होते हैं राष्ट्रीय हित और शायद इसी वजह से कभी अमेरिका भारत को झुकाता हुआ दिखता है तो कभी भारत अपनी शर्तों पर दुनिया को चौंका देता है।
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