दिल्ली ब्लास्ट में रोहतक की डॉक्टर प्रियंका गिरफ्तार मीडिया की चुप्पी क्यों?
दिल्ली ब्लास्ट की गूंज अभी तक देश के कानों में ताज़ा है। धमाके ने सिर्फ दिल्ली को नहीं हिलाया, बल्कि पूरे सिस्टम, सुरक्षा और मीडिया की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। और अब इस केस में सबसे बड़ा मोड़ आया है रोहतक की डॉक्टर प्रियंका की गिरफ्तारी। हाँ, वही प्रियंका सफेद कोट पहनने वाली, लोगों का इलाज करने वाली डॉक्टर, लेकिन जांच एजेंसियों को लंबे समय से शक था कि उसकी दुनिया कोट के पीछे छुपे सच से कहीं ज्यादा जटिल है।
प्रियंका कौन है और उससे जुड़े लोग कौन हैं?
जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रियंका सिर्फ एक साधारण डॉक्टर नहीं, बल्कि कुछ संदिग्ध डॉक्टरों और नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। इसी नेटवर्क के चलते एजेंसियां कई दिनों से इस पर नजर रख रही थीं। फोन रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा, और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने एजेंसियों का शक पक्का कर दिया। जिसके बाद प्रियंका को गिरफ्तार किया गया। और यहीं से शुरू होता है असली सवाल
माइक घुसेड़ देने वाले यूट्यूबर आज खामोश क्यों?
जब भी देश में कोई बड़ी वारदात होती है और आरोपी मुसलमान निकले, कुछ यूट्यूबर सड़क पर उतर आते हैं।
मुसलमान ऐसा क्यों करते हैं?
आप अपने समुदाय को क्यों नहीं रोकते?
देश की छवि कौन खराब कर रहा है?
माइक आम लोगों के मुँह में घुसेड़ दिया जाता है।
रोड पर शोर, कैमरे, गुस्सा सब कुछ।
लेकिन आज आरोपी का नाम “प्रियंका” है।
पहचान डॉक्टर की।
कोई दाढ़ी नहीं, कोई टोपी नहीं, कोई मदरसा नहीं।
तो क्या अब वही यूट्यूबर बाहर आकर पूछेंगे?
डॉक्टर ऐसा क्यों करते हैं?
प्रियंका जैसा व्यवहार समाज की छवि खराब करता है?
आप लोग ऐसे मामलों को क्यों नहीं रोकते?
जवाब है नहीं।
क्योंकि नेरेटिव फिट नहीं बैठता। और इसी वजह से चैनल भी शांत, यूट्यूबर भी शांत।
मीडिया में सन्नाटा आखिर क्यों?
अगर आरोपी का नाम कुछ और होता, तो अब तक: प्राइम टाइम डिबेट 100 रिपोर्ट घर के बाहर मीडिया की भीड़ सोशल मीडिया पर तूफ़ान लेकिन अब? बस एक छोटी सी लाइन और फिर चुप्पी। ये चुप्पी ही सबसे जोरदार आवाज़ है।
ये बताती है कि मीडिया सवाल पहचान देखकर पूछता है,
अपराध देखकर नहीं।
जांच अब किस दिशा में बढ़ रही?
अभी तक मिली जानकारी प्रियंका दिल्ली ब्लास्ट के दिन लोकेशन पर थी फोन में संदिग्ध बातचीत मिली कुछ डॉक्टरों और संगठनों से कनेक्शन इलेक्ट्रॉनिक सबूत पुलिस के पास मौजूद अभी खेल शुरू हुआ है। कहानी जितनी दिखाई दे रही है, उससे ज्यादा छुपी हुई है। और यह केस बहुत दूर जाने वाला है।
निष्कर्ष अपराध का धर्म नहीं होता, तो सवाल का भी धर्म नहीं होना चाहिए
दिल्ली ब्लास्ट देश के खिलाफ हमला था। उसका आरोपी चाहे कोई भी हो सवाल तो एक जैसा होना चाहिए। लेकिन आज मीडिया चुप है यूट्यूबर चुप हैं, और जनता सोच रही है
क्या सवाल पहचान देखकर तय किए जाते हैं?
