यह कहानी है भारत के उन लाखों लोगों की
जो हर चुनाव से पहले अपनी उंगलियों पर स्याही लगवाकर समझते थे कि वो इस देश की आवाज़ हैं। लेकिन इस बार उनकी आवाज़ ही चुपचाप मिटा दी गई। हाँ—मिटा दी गई।
बिना बताये। बिना पूछे। बिना किसी नोटिस के।
शुरुआत एक छोटे से गाँव से होती है
बिहार के एक गाँव में 62 साल के रामखिलावन यादव सुबह-सुबह अपने दरवाज़े पर आए Booth Level Officer को देखकर खुश हो गए। “इस बार चुनाव में महागठबंधन जीतेगा।” उन्होंने हँसते हुए कहा। लेकिन BLO ने जो कहा, उसने उनकी हँसी छीन ली “चाचा, आपका नाम लिस्ट में नहीं है। आप वोट नहीं डाल सकते।” रामखिलावन तड़प गए। 50 साल से वोट डालने वाला आदमी। जिसने आपातकाल से लेकर आज तक एक भी चुनाव मिस नहीं किया उसे कहा जा रहा था कि “आप अब वोटर नहीं रहे।”

ऐसा सिर्फ रामखिलावन के साथ नहीं हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ इलाकों में 50,000 से लेकर 5 लाख तक वोटर्स के नाम बिना जानकारी हटाए गए। कुछ जगह जाति के आधार पर, कुछ जगह धर्म के आधार पर, कुछ जगह सिर्फ इसलिए कि उन्होंने किसी राजनीतिक पार्टी की आलोचना की थी। यह कोई गलती नहीं थी। यह कोई एरर नहीं था। यह एक पैटर्न था।
ये Scam काम कैसे करता है? (सबसे यूनिक Explainer)
यह Scam तीन चरणों में काम करता है:
1️⃣ पहला चरण – चुपचाप “डिलीट”
BLO या कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म भर देते हैं। कारण? “यह व्यक्ति यहाँ नहीं रहता।”
या “यह फ़र्जी वोटर है।” 90% लोग जानते भी नहीं कि उनके नाम हट चुके हैं।
2️⃣ दूसरा चरण – “Duplicate” का खेल
सैकड़ों लोगों के नाम, पिता का नाम, घर का नंबर ऐसे कॉपी किए जाते हैं कि एक ही नाम दो-दो जगह दिखने लगता है।
फिर कहा जाता है “Duplicate होने के कारण नाम हटाया गया।” असल में हटाया जाता है असल वोटर, और बचता है नकली डेटा।
3️⃣ तीसरा चरण – चुनाव के दिन असली खेल
जब असली voter Booth पहुँचता है, उसे कहा जाता है
“नाम नहीं है। और जब आंकड़े निकलते हैं, तो जीत-हार का मार्जिन 1000, 500, यहाँ तक कि 200 वोट का हो जाता है। एक वोट की कीमत समझ आ रही है न?

सबसे बड़ा सवाल: नाम हटाए क्यों जा रहे हैं?
अंदर की खबरें बताती हैं कि
👉 विपक्ष वाले इलाकों में नाम काटे जा रहे हैं
जहाँ सरकार विरोधी वोट ज़्यादा मिलते हैं।
👉 दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक इलाकों में सबसे ज्यादा नाम हटे
क्योंकि यह वोट महत्त्वपूर्ण होते हैं और चुनाव बदल देते हैं।
👉 कई कार्यकर्ताओं ने टारगेट बनाकर लोगों को ‘विदेशी’, ‘बांग्लादेशी’ तक बताया
ताकि नाम हटाने में आसानी हो जाए।
लाखों वोटर अचानक से ‘गायब’ यह कोई Coincidence नहीं
सोचिए अगर किसी राज्य में 4–5 लाख नाम गायब हो जाएँ,
और चुनाव सिर्फ 20–25 हजार वोट से जीता जाए तो क्या इसे लोकतंत्र कहा जाएगा? या एक प्री-प्लांड कूप?
लोगों की असल कहानियाँ दर्द जो कोई नहीं दिखाता
🌑 1. रानी खातून (दिल्ली)
“6 साल से यही घर है फिर भी मेरी बेटी का नाम लिस्ट से गायब है। क्या हम इस देश के नहीं हैं?”
🌑 2. नन्हेंलाल (यूपी)
“मेरी बूढ़ी माँ की इमेज लगाकर किसी ने फॉर्म डाल दिया कि वो मर चुकी है। जबकि वो मेरे सामने बैठी सूती कंबल बुन रही थी।”
🌑 3. समीरा बानो (महाराष्ट्र)
“Booth पर कहा—यह फोटो आपकी नहीं है।
मैंने कहा ये तो 2019 की मेरी ही फोटो है।”
इस Scam में टेक्नोलॉजी का रोल (सबसे यूनिक पॉइंट)
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ जिला स्तर के इंचार्ज़ अपने “डेटा टीम” के साथ मिलकर पूराडिजिटल Voter List Manipulation कर रहे हैं। AI Software से मिलती-जुलती तस्वीरें खोजकर नाम हटाया जाता है या Duplicate दिखाया जाता है। यही कारण है गलत, दोहरी, और गायब वोटर एंट्री तेज़ी से बढ़ी हैं।

सबसे बड़ा खतरा क्या है?
अगर वोटर लिस्ट फर्जी है…
तो चुनाव भी फर्जी है।
अगर चुनाव फर्जी है…
तो सरकार भी फर्जी है।
फिर लोकतंत्र का मतलब क्या रह गया?
अब क्या होना चाहिए? (Strong Conclusion)
✔ हर वोटर को SMS पर जानकारी मिलनी चाहिए
✔ Voter List अपडेट की प्रक्रिया Online + Transparent हो
✔ हर नागरिक को 10 मिनट का Verification Portal मिले
✔ नाम हटाने से पहले वीडियो वेरिफिकेशन अनिवार्य हो
✔ चुनाव आयोग को अपनी Power का इस्तेमाल करना चाहिए, ना कि दबाव में काम
वोटर लिस्ट से नाम हटाना सिर्फ एक गलती नहीं…
एक लोकतांत्रिक हत्या है।
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