बिहार में मकान तोड़ने शुरू! गरीबों का घर उजड़ा, बुलडोज़र से ‘₹10,000 वाले विकास’ की शुरुआत?
सुबह के 6 बजकर 10 मिनट। एक छोटी सी गली। चारों तरफ धूल और सड़क पर दौड़ती एक जेसीबी मशीन।
किसी को समझ नहीं आया ये मशीन यहाँ क्यों आई है।
फिर कुछ ही क्षणों में सरकारी गाड़ियाँ आने लगीं, पुलिस ने इलाके को घेर लिया और एक आवाज़ गूँजी
“यह मकान अवैध है, इसे तुरंत खाली करें!”
और देखते ही देखते एक गरीब परिवार का घर, जिसकी एक-एक ईंट में उनकी ज़िंदगी की कमाई थी, सरकारी मशीनों के नीचे मिट्टी में मिलना शुरू हो गया। यही है आज का बिहार। जहाँ गरीबों के आंसुओं की कीमत शून्य है…
लेकिन बुलडोज़र का क्रोध अनलिमिटेड।
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1: गरीब का घर नेता का वादा और सत्ता की सच्चाई
Election के समय यही गरीब वोटर था। उसी गरीब को कहा गया था
ले लो ₹10,000 हमारे साथ रहो विकास आएगा
पर आज जो आया है वह विकास नहीं, विनाश का सर्टिफिकेट है।
एक बुजुर्ग महिला रोते हुए कहती है “बेटा, घर बनवाने में 20 साल लगे तोड़ने में 2 मिनट लगे ये कैसा विकास?
लेकिन यह दर्द सिर्फ़ एक महिला का नहीं। ये बिहार के हजारों गरीब परिवारों की आवाज़ है, जो आज डर में जी रहे हैं “कहीं अगला नंबर हमारा न हो जाए।”
2: सवाल जो हर गरीब पूछ रहा है कानून सिर्फ गरीबों के लिए क्यों?
सरकार कहती है: “अवैध निर्माण पर कार्रवाई चल रही है।” लेकिन गरीब पूछता है क्या अमीरों के फार्महाउस अवैध नहीं? क्या नेताओं के रिसॉर्ट, होटल, कॉलेज अवैध नहीं?
उनके घरों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलता? ये बुलडोज़र हमेशा गरीब की झुग्गी ढूंढ लेता है पर नेताओं की कोठी को कभी रास्ता नहीं मिलता। यही है सिस्टम की सबसे दर्दनाक सच्चाई।
3: घर सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं होता
एक घर गरीब के लिए सिर्फ चार दीवारें नहीं होता। वो उसकी उम्मीद होती है। उसकी मेहनत का रिज़ल्ट होता है। उसकी बेटी की शादी का सपना होता है। उसकी बूढ़ी माँ की इज़्ज़त होती है। लेकिन जब बुलडोज़र चलता है वो सिर्फ दीवारें नहीं टूटतीं, वो सपने टूटते हैं वो भरोसा टूटता है वो इंसान टूट जाता है। और आज बिहार में यही हो रहा है।
4: नेता मंच से बोलते हैं “विकास हो रहा है
ज़मीन पर गरीब कहता है “हमारा विनाश हो रहा है।” सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को सब ठीक दिखता है। उनके लिए यह सिर्फ “एक्शन” है। उनके लिए यह “कानून” है। लेकिन सच यह है कानून जब पक्षपाती हो जाता है तो न्याय मर जाता है। और आज बिहार में गरीबों के लिए न्याय नहीं बल्कि चुप्पी बची है।
5: राजनीति का नया मॉडल डरा दो, गिरा दो, चुप करा दो
चुनाव से पहले: राशन कार्ड, ₹10,000 की स्कीम, घर-घर प्रचार चुनाव के बाद: उसी घर पर बुलडोज़र। ये डर का नया मॉडल है गरीब को इतना कमजोर बना दो कि वो बोल न सके। अगर आवाज़ उठाएं, तो पहले घर गिराओ फिर साहस।
यह सिर्फ राजनीतिक हमला नहीं है। यह सामाजिक हमला है। यह आर्थिक हमला है। यह गरीब की रीढ़ तोड़ने की कोशिश है।
6: लोग कह रहे हैं “इससे अच्छा तो वोट ही न देते
जिन लोगों ने सरकार पर भरोसा किया आज वही सबसे ज़्यादा टूटा हुआ महसूस कर रहे हैं।
एक आदमी का बयान वायरल हो गया,
“इतने साल किराये में रहे किसी तरह थोड़ा-थोड़ा जोड़कर घर बनाया और आज सरकार ने कहा यह अवैध है? अवैध हमारा घर है या आपकी नीतियाँ?”
लोग गुस्से में हैं। लोग डरे हुए हैं। और लोग सवाल पूछ रहे हैं।
पर सवाल पूछना अब अपराध बन चुका है।
7: सत्ता का जवाब और जनता का पलट सवाल
सरकार कह रही है “हम कानून का पालन करवा रहे हैं।”
जनता पूछ रही है
“क्या कानून सिर्फ गरीबों पर लागू होता है?”
“क्या पहले नोटिस नहीं दिया जा सकता था?”
“क्या पहले पुनर्वास नहीं होना चाहिए था?”
क्योंकि गरीब को गिराकर सरकार कहती है
“अब जाओ, कहीं और रहो।”
8: असली डर इसके बाद क्या?
आज घर टूटा है कल दुकान टूटेगी परसों ज़मीन छीनी जाएगी
और उसके बाद शायद आवाज भी। गरीब का डर यह नहीं है कि उसका घर टूटा। गरीब का डर यह है कि उसका भविष्य टूट गया।
सवाल ये नहीं है कि बिहार में घर अवैध है या नहीं।
सवाल यह है,
क्या गरीब की ज़िंदगी भी अवैध है?
सवाल यह नहीं कि बुलडोज़र चला क्यों।
सवाल यह है,
किस पर चला?
और सबसे बड़ा सवाल,
क्या यही है ₹10,000 वाला विकास, जो वादा करके दिया गया था?
अगर विकास ऐसा होता है…
तो विनाश किसे कहते हैं?
यह सिर्फ एक बिहार की बात नहीं है यह हर उसे राज्य की बात है जहां बीजेपी की सरकार है हम बीजेपी का विरोध नहीं कर रहे हम सिर्फ बता रहे हैं उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है वहां पर मकान टूटे दिल्ली में बीजेपी की सरकार है वहां मकान टूटे जहां-जहां भी है आप देख लो उठाकर हर जगह मकान तोड़े गए हैं बाकी आप सब अपनी राय कमेंट सेक्शन में लिखते जाएगा
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