Government का Sanchar Saathi App – Security Tool या Mobile Spy?

Government का Sanchar Saathi App – Security Tool या Mobile Spy?

भारत में हर महीने कोई न कोई नई सरकारी ऐप लॉन्च होती रहती है। लेकिन इस बार जो ऐप चर्चा में है “संचार साथी वह सिर्फ ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसा डिजिटल दरवाज़ा है जिसके दूसरी तरफ एक बड़ा सवाल खड़ा है:

क्या सरकार सच में आपका डेटा सुरक्षित कर रही है या आपकी हर छोटी-बड़ी बात पर नज़र रख रही है?

तस्वीर की शुरुआत

रात के 12 बजे, राहुल एक आम भारतीय युवक व्हाट्सऐप चला रहा था, तभी उसके फोन में एक नोटिफिकेशन आया:

“Check if someone else is using your number Download Sanchar Saathi now.”

उसने सोचा “वाह! अच्छा ऐप है… सुरक्षा के लिए। लेकिन जैसे ही उसने ऐप खोला, उसने नोटिस किया कि ऐप उसके फोन का IMEI, उसकी कॉल हिस्ट्री का पैटर्न, और दर्जनों परमीशन मांग रहा है।

दिमाग में पहला सवाल कौंधा ये सब क्यों चाहिए?

Sanchar Sathi app reality

यह भी पढ़ें, Hair Loss क्यों होता है? कारण, लक्षण और 100% असरदार घरेलू इलाज – पूरी जानकारी

संचार साथी ऐप क्या है?

सरकार कहती है कि यह ऐप दो मुख्य काम करता है:

1. आपका मोबाइल क्लोन हुआ है या नहीं बताएगा

कोई दूसरा आपकी सिम या IMEI का गलत उपयोग कर रहा है, तो पकड़ लेगा।

2. फ्रॉड कॉल, स्कैम नंबर, चोरी हुआ मोबाइल  सब ट्रैक करेगा।

अब तक तो सब ठीक। लेकिन कहानी का रोचक हिस्सा यहां से शुरू होता है

डेटा सारी समस्या की जड़

संचार साथी ऐप चलने के लिए जिन डेटा की मांग करता है, वे साधारण नहीं हैं:

डिवाइस का पूरा IMEI

सिम की KYC स्थितियाँ

लोकेशन बदलने का पैटर्न

नेटवर्क किस-किस वक्त पर कहां लॉग इन हुआ

किन ऐप्स का नेटवर्क किस तरह उपयोग होता है


यह डेटा किसी भी एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम के लिए सोने की खान है।

क्यों?

क्योंकि फोन का IMEI + सिम डेटा + नेटवर्क पैटर्न = एक पूरी डिजिटल प्रोफ़ाइल।

यह जानना मुश्किल नहीं कि आप कब, कहां और किससे जुड़े हैं।

sanchar sathi App Real jankari

डर क्यों बढ़ रहा है?

भारत में नया ट्रेंड चल रहा है:

पहले सरकार ऐप लॉन्च करती है,
फिर जनता परमीशन देती है,
फिर डेटा इकट्ठा होता है,
और फिर जनता खुद पूछती है

“हमारी प्राइवेसी कहाँ गई?”

हम पहले ही देख चुके हैं:

आधार

फास्टैग

COWIN

डिजिलॉकर

नेशनल मोबिलिटी कार्ड


हर ऐप ने सुविधा दी लेकिन डेटा भी लिया उसका इस्तेमाल कहां, कब और कितना होता है यह आम लोग नहीं जानते।

संचार साथी के मामले में खतरा क्या है?

Sanchar Sathi app ki reality

खतरा 1: डेटा स्टोरेज का कोई साफ़ रोडमैप नहीं

कितने दिन डेटा रहेगा?
कैसे डिलीट होगा?
कौन-कौन एक्सेस करेगा?

स्पष्ट जवाब नहीं।

खतरा 2: डेटा एनालिटिक्स + AI मॉड्यूल्स

अगर यह डेटा सरकारी AI सिस्टम में चला गया,
तो किसी भी नागरिक का पूरा डिजिटल नक्शा तैयार किया जा सकता है।

खतरा 3: “नाम पर सुरक्षा, असल में निगरानी” का डर

इतिहास बताता है कि दुनिया भर में सरकारें सुरक्षा के बहाने निगरानी बढ़ाती हैं।

क्या सरकार आपका डेटा चुरा रही है?

सीधा जवाब: चोरी शब्द कानूनन गलत है। लेकिन डेटा कलेक्शन बहुत विशाल है, और उसका इस्तेमाल कितना पारदर्शी है यह सवाल जवाब मांगता है। ऐप का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा है लेकिन इसके डेटा एक्सेस परमिशन नागरिकों में शक पैदा करते हैं।

क्या यह ऐप जरूरी है? बिल्कुल।

आज के दौर में:

मोबाइल क्लोनिंग

सिम स्वैप

फ्रॉड

बैंकिंग स्कैम

फर्जी IMEI


बहुत बढ़ चुके हैं।
यह ऐप इनसे बचाता है।

लेकिन

सवाल डेटा का नहीं, भरोसे का है

भारत में पारदर्शिता की कमी है।
जब सरकार स्पष्ट रूप से न बताए कि:

हमारा डेटा कहां जा रहा है?

किसे दिया जा रहा है?

कितने दिन रखा जाएगा?

कौन इसकी निगरानी करेगा?


तब जनता डरती है— और यह डर जायज़ है।

यूनिक नतीजा (Conclusion):

संचार साथी एक दोमुंही तलवार है:

🟢 एक तरफ:

यह आपका मोबाइल सुरक्षित करता है—
आपको साइबर अपराध से बचाता है।

🔴 दूसरी तरफ:

यह आपके फोन के हर डिजिटल खिड़की से झांक सकता है


आपकी लोकेशन, आपका डिवाइस, आपकी गतिविधि… सब सरकार तक पहुंच सकती है।

ऐप अच्छा है।
इद्देश साफ़ है।
लेकिन इसकी पारदर्शिता… धुंधली है।

और इसी धुंधलेपन में आम नागरिक का डर छिपा है।

यह भी पढ़ें, PhonePe Mod APK Prank Payment App: दोस्तों के साथ Unlimited Fake Payment भेजकर मज़ाक करें

यह भी पढ़ें, बिहार में मकान तोड़ने शुरू! गरीबों का घर उजड़ा, बुलडोज़र से ‘₹10,000 वाले विकास’ की शुरुआत?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *