ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा का एक और वीडियो सामने आया, FIR के बावजूद बेखौफ आरोपी
ईसाई समुदाय के साथ हुई हिंसक वारदात का एक और वीडियो अब सामने आया है। इस वीडियो में वही शख्स साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है, जिसने कुछ दिन पहले ईसाई समुदाय को खुलेआम धमकियाँ दी थीं।
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हैरानी की बात यह है कि इस मामले में यूपी पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। FIR होने के बावजूद न तो आरोपी की गिरफ्तारी हुई, न ही उसकी गतिविधियों पर कोई रोक लगाई गई।
वीडियो में आरोपी न सिर्फ खुलेआम घूमता दिख रहा है, बल्कि दोबारा हिंसक गतिविधियों में शामिल होता भी नज़र आ रहा है। यह सवाल उठना लाज़मी है कि अगर FIR के बाद भी आरोपी को खुली छूट है, तो ऐसी FIR का मतलब क्या है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी पहले भी धमकियाँ दे चुका है और शिकायत के बावजूद पुलिस की कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रही। अब जब एक और वीडियो सामने आ चुका है, तो पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या कानून सिर्फ दर्ज़ होने तक सीमित है?
क्या अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा केवल बयानबाज़ी तक रह गई है?
और क्या आरोपी को किसी राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण का लाभ मिल रहा है?
यह मामला सिर्फ एक समुदाय पर हुए हमले का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की साख का भी है। अगर FIR के बाद भी अपराधी बेखौफ घूमते रहें, तो आम नागरिक किससे सुरक्षा की उम्मीद करे?
अब देखना होगा कि इस नए वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस महज़ सफ़ाई देती है या वाकई ज़मीनी कार्रवाई करती है।
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