क्या एक ऐसा नेता जिस पर दंगा भड़काने से लेकर हत्या की कोशिश तक के आरोप लगे हों वही आगे चलकर देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है? और जब वो सत्ता में आया तो क्या सच में उसने अपने ही केस खत्म करवा दिए? आज हम बात करेंगे Yogi Adityanath की एक ऐसी कहानी, जिसमें आरोप भी हैं, गिरफ्तारी भी और फिर ‘कानूनी सफाई’ भी।

90 के दशक की शुरुआत – पहला केस
📍 1995 – गोरखपुर कहानी शुरू होती है 90 के दशक से
उस समय योगी आदित्यनाथ एक उभरते हुए हिंदू नेता थे।गोरखपुर में एक सभा के दौरान प्रशासन ने धारा 144 लगा रखी थी। लेकिन योगी ने सभा की, भाषण दिया और यहीं दर्ज हुआ पहला केस: IPC 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन) यह एक “राजनीतिक प्रदर्शन” वाला केस था सालों तक चला लेकिन बाद में सरकार ने इसे वापस लेने की प्रक्रिया में डाल दिया
1999 – सबसे बड़ा आरोप (हत्या का मामला)
पंचरुखिया, महाराजगंज 1999 में एक बड़ा विवाद हुआ
आरोप लगा कि योगी आदित्यनाथ के काफिले पर हमला हुआ और जवाबी फायरिंग में एक पुलिसकर्मी (सत्य प्रकाश यादव) की मौत हो गई आरोप: हत्या (IPC 302) गंभीर हिंसा मामला बहुत बड़ा बना राजनीतिक रंग भी चढ़ गया
लेकिन जांच गई CB-CID के पास कई सालों तक जांच चली और फिर: 👉 2019 में कोर्ट ने कहा पर्याप्त सबूत नहीं हैं केस खत्म (dismiss) कर दिया गया यानी: सबसे बड़ा केस लेकिन कोर्ट में टिक नहीं पाया
2007 – गोरखपुर दंगे और गिरफ्तारी
गोरखपुर 2007 में माहौल अचानक बिगड़ गया दंगे भड़क उठे आरोप लगा कि योगी आदित्यनाथ ने एक भड़काऊ भाषण दिया धाराएँ लगीं: 153A (समुदायों में नफर फैलाना)
295A (धार्मिक भावनाएं आहत करना) दंगा (147, 148)
इसके बाद क्या हुआ? योगी आदित्यनाथ गिरफ्तार हुए कई दिनों तक जेल में रहे यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना
छोटे-छोटे केस (धरना, प्रदर्शन, भाषण)
1995 से 2010 के बीच योगी आदित्यनाथ पर कई छोटे केस दर्ज हुए: धरना देने पर भाषण देने पर पुलिस आदेश न मानने पर आम धाराएँ: IPC 188, IPC 506, IPC 504 ये केस ज़्यादातर राजनीतिक एक्टिविटी पब्लिक ऑर्डर” से जुड़े थे और सालों तक कोर्ट में चलते रहे

2017 – जब योगी बने मुख्यमंत्री
2017 में Yogi Adityanath उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और यहीं से शुरू हुआ सबसे बड़ा विवाद सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया: पुराने राजनीतिक केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू आंकड़ा: 20,000+ केस हटाने की बात सामने आई
इसमें शामिल थे: धरना प्रदर्शन दंगा (कम गंभीर) भाषण से जुड़े केस और इन्हीं में योगी आदित्यनाथ के कुछ केस भी शामिल थे विपक्ष ने कहा: “सत्ता में आते ही अपने केस साफ कर लिए लेकिन सरकार का तर्क: ये केस: बहुत पुराने थे राजनीतिक थे छोटे स्तर के थे इसलिए हटाए गए
योगी का बयान
2023 में योगी आदित्यनाथ ने खुद कहा: मैंने अपने खिलाफ कोई केस वापस नहीं लिया उनका कहना था: यह सरकार की नीति थी व्यक्तिगत फैसला नहीं तो सच्चाई क्या है? योगी पर 5–6 मुख्य केस थे एक हत्या का केस भी था → कोर्ट ने खत्म किया बाकी कई केस → सरकारी नीति से हटे लेकिन 51 केस वाला दावा सही नहीं खुद बैठकर सारे केस खत्म किए इसका सबूत नहीं “तो क्या ये सब राजनीति थी या कानून का सही इस्तेमाल? “क्या योगी आदित्यनाथ पर लगे आरोप सिर्फ एक दौर की कहानी थे या सच में कुछ छुपाया गया? फैसला अब आप करें
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