धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा में बड़ा ड्रामा बुखार चढ़ा, डॉक्टरों की लाइन लग गई लेकिन जनता का सवाल और भी बड़ा है
हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर निकली धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा इस समय सुर्खियों में है। हजारों की भीड़, नारे, भक्तों का जोश सब कुछ बिल्कुल योजनाबद्ध चल रहा था। लेकिन इसी बीच एक अचानक मोड़ आया धीरेंद्र शास्त्री को तेज बुखार हो गया। जैसे ही ये खबर फैली, मेडिकल टीम तुरंत मौके पर पहुंची। डॉक्टरों की एक लंबी लाइन खड़ी हो गई, हर कोई उनकी जांच में लगा। सोशल मीडिया पर लोगों ने चिंता भी जताई लेकिन इसके बीच एक बड़ा और दिलचस्प सवाल उठ खड़ा हुआ है, जो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जनता का सबसे बड़ा सवाल भक्तों को गोमूत्र गोबर देने वाले खुद डॉक्टर क्यों बुला रहे हैं?
ये कोई आम कमेंट नहीं बल्कि हजारों लोग यही बात कॉमेंट्स में लिख रहे हैं👇
जब भक्तों को हर बीमारी का इलाज गाय का मूत्र और गोबर बताया जाता है तो शास्त्री जी के लिए डॉक्टर क्यों बुलाए गए? डॉक्टरों को हटाओ… एक ढक्कन गौमूत्र और दो चम्मच गोबर खिला दो सब ठीक हो जाएगा
ये बात व्यंग्य में कही जा रही है, लेकिन पब्लिक का तर्क बिल्कुल साफ है
अगर किसी विशेष आयुर्वेदिक या पारंपरिक इलाज का दावा किया जाता है, तो खुद उस पर भरोसा क्यों नहीं जताया जाता?
सोशल मीडिया पर लोग क्या कह रहे हैं?
हर प्लेटफॉर्म पर यही ट्रेंड चल रहा है। कुछ लोग चिंता जाहिर कर रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या ऐसे यूज़र्स की है जो सवाल पूछ रहे हैं आयुर्वेद सबके लिए है, तो फिर खुद पर लागू क्यों नहीं? डॉक्टर अच्छे हैं, कोई दिक्कत नहीं… लेकिन भक्तों को दूसरी सलाह क्यों? दोहरे मानदंड आखिर क्यों? इन सवालों ने इस पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी है।
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डॉक्टर vs परंपरागत इलाज बहस फिर गर्म
इस घटना के बाद फिर से वही पुरानी बहस शुरू हो चुकी है
वैज्ञानिक इलाज बेहतर है या पारंपरिक? दरअसल, समस्या किसी इलाज की नहीं, बल्कि उन दावों की है जो आम जनता के लिए किए जाते हैं, लेकिन खुद वो लोग उन पर अमल नहीं करते। यही कारण है कि जनता सवाल पूछ रही है, तंज कर रही है, और इस मुद्दे को बड़ा बना दिया गया है।

पदयात्रा में क्या हुआ आगे?
मेडिकल टीम की जांच के बाद बताया गया कि यह सामान्य बुखार है और स्थिति नियंत्रण में है। पदयात्रा को कुछ घंटे के लिए धीमा किया गया, लेकिन आयोजन पक्ष का कहना है कि कार्यक्रम जारी रहेगा।
लोगों की राय क्या है?
जनता दो हिस्सों में बंटी हुई है एक तरफ वो लोग हैं जो कह रहे हैं कि “किसी इंसान की तबीयत खराब हो जाए तो डॉक्टर ही चाहिए दूसरी तरफ वो लोग जो सवाल पूछ रहे हैं कि “जो इलाज भक्तों को बताया जाता है, वही खुद क्यों नहीं अपनाया? सवाल बड़ा है बहस और भी बड़ी।
लेकिन असली जवाब जनता ही दे रही है कमेंट सेक्शन में।
आप क्या सोचते हैं?
क्या पब्लिक की बात सही है? क्या ये सिर्फ़ ट्रोलिंग है या एक वास्तविक सवाल? अपनी राय नीचे बताइए comment section Mein bataiye

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